होली के बाद

रंगों से रंगा सियार हो गए हम

लगा जैसे होसियार हो गए हम

यारों ने पटका कीचड़ में इतना कि

बार-बार नहाने से बीमार हो गए हम ।

पल-भर  में चढ़ी नशा भांग की उतर गई

देख हूलिया जब  पहचान से वो मुकर गई

गुस्से मे नथूनी उसकी नाक की ऐसी छिटकी कि

लगा जैसे गिरी आईना आसमान से बिखर गई ।

©अमित

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp chat