लड़की की अभिलाषा

चित्र आभार : गूगल

मै भी प्यार चाहती हूँ

घर-बार और नया संसार चाहती हूँ

हिलोरे भरती इस यौवन में अपनी

तुम-सा कोई यार चाहती हूँ ।

 

व्याकूल है मन छाई है काली रातों का घेरा

जाने इस उर्म में अपनी होगी कब नई सवेरा

मिले चाँद ग़र तुम-सा कोई

भवसागर को करना पार चाहती हूँ…

 

हद हो गई है यारों  इस तन्हाई की

जाने वक्त आएगा कब शहनाई की

निःरस इस जीवन में अपनी महबूब कोई

तुम-सा होशियार चाहियार चाहती हूँ…

 

तन-मन में मादकता का संचार चाहती हूँ

मै जीवन का नया आधार चाहती हूँ

मिलें ग़र संगी तुम-सा कोई

माँँग मेंं अपनी कुमकुम का सृंगार चाहती हूँ…

 

स्वयं को देना नया आकार चाहती हूँ

पावों में अपनी पायल घुँघरूदार चाहती हूँ

मिले ग़र इस फागुन में तुम-सा उन्मादी कोई

जिश्मों पर अपनी रंगों का बौछार चाहती हूँ…

©अमित कुमार ‘फोर्बेसगंजी’

 

 

 

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