न हिन्दू का खून बहे, न किसी मुसलमान का खून बहे।

                  ॥ऐकता की कीमत॥

न हिन्दू का खून बहे,न किसी मुसलमान का खून बहे।
भाई-भाई का खून है,न किसी इन्सान का खून बहे।।
बहाना ही पड़े खून ग़र अमन चैन के वास्ते।
तो हक-हिफाजत में खून हर नौ-जवान खा बहे।।

सहादती हिदायत का हरदम तू ख्याल रखना।
कि भारत को भारत और पाकिस्तान को पाकिस्तान रखना।।
जब कभी आऐ  प्रजातंत्र पर कोई आँचदोस्तों।
तो जान-आन की कीमत पर जलाए मशाल रखना।।

© अमित फोर्बेसगंजी

चित्र आभार :गूगल

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