किसान और बादल

देखकर फटती काया बादलों की

किसानों ने एक आश पाली होगी,

समझे ग़र दर्द हमारा ईश्वर कभी

तो आज नही तो कल

हमारे घर भी हरियाली होगी ।

©अमित फोर्बेसगंजी

चित्र आभार : गूगल

 

 

2 thoughts on “किसान और बादल”

  1. क्या बात कही है गुरु, आपने तो किसानों की व्यथा को हू-ब-हू पन्नों की धरातल पर उतारकर रख दिया है। आपके इस अतुलनीय कार्य हेतु दिल से नमन करते हैं।
    BY:- U. S. ‘RAJ'(A HIDDEN FACE)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp chat