अंदाज अपना अपना

मै गीत लिखता जाऊँ

मै गीत लिखता जाऊँ
तेरी प्रीत लिखता जाऊँ !
के ढल रही है ये समां
मै यौवन का हर रीत लिखता जाऊँ !
भँवर न उलझा रह जाए कहीं
इस मोहिनी उपवन में तुम्हारी !
के  छोटी इस उम्र में अपनी
बात बड़ी गढ़ता जाऊँ !
मै खान बनूँ मधुशाला का
तेरी धर्मों में न झूलसा जाऊँ !
के मै मान बनूँ पाठशाला का
कर्मों का मै अपनी नष्कर्श लिखता जाऊँ !
मै गीत लिखता जाऊँ
तेरी प्रीत लिखता जाऊँ !
के ढल रही है ये समां
मै यौवन का हर रीत लिखता जाऊँ !
  ©अमित  फोर्बेसगंजी 

चित्र आभार : गूगल

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