मिले ग़र सानिध्य आपका

 ॥ मिले ग़र सानिध्य आपका ॥ चित्र आभार : गूगल मिले ग़र सानिध्य आपका अपनी प्रतिभा को हम भी          निख़ारना चाहते है । मोनू जी आपके ही जैसा हम भी स्वच्छंद उड़ना चाहते है । मिले ग़र सानिध्य आपका अपनी तंगहाली को हम भी      साहित्य में पिरोना चाहते है […]

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उसकी निगाहें

                                ॥ उसकी निगाहें ॥ झकझोरती है उसकी यादें मुझे अब भीशायद निगाहें उसकी कुछ कहना चाहती थी ।                    वो जुबां से कुछ कह ना सकी और          […]

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मेरी गुनाह क्या है ।

               ॥ मेरी  गुनाह क्या है ।। चित्र आभार :गूगल क्यूं हूँ मै बेबस मेरी गुनाह क्या है । क्यो भटकती हूँ मै दर-दर मेरी पनाह कहाँ है ।                       मै जख्मी हूँ मै लूटी हूँ       […]

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तुम और हम ।

                   ॥तुम और हम॥ तुमने हाँक लगाई, हम हुँकार बन गये। तुमने हाथ लगाया, हम हथियार बन गए।।                      तेरी फूँक से उठी थी चिन्गारी कभी-                      धधक उठीं […]

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न हिन्दू का खून बहे, न किसी मुसलमान का खून बहे।

                  ॥ऐकता की कीमत॥ न हिन्दू का खून बहे,न किसी मुसलमान का खून बहे। भाई-भाई का खून है,न किसी इन्सान का खून बहे।। बहाना ही पड़े खून ग़र अमन चैन के वास्ते। तो हक-हिफाजत में खून हर नौ-जवान खा बहे।। सहादती हिदायत का हरदम तू ख्याल रखना। […]

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मेरी पहली कविता

!! कैसे जियूं मै इस उमर में!! जिन्दगीं की सफर में गाँव हो या शहर में जीना दुर्बल हो गया है मेरा इस उपभोक्तावादी शहर में । भोग-उपभोग ही सुख बनी है हर एक घर में सुबह-शाम हों या दोपहर में एक-एक दानें को तरसता हूँ मै परलोक जाने की इस पहर भें कैसे जियूं […]

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