चाहत है नही मेरी, किसी के राहों का काँटा बन जाना !

अपने प्रेम के खातिर, किसी के प्रीत का छिन जाना !! दुर्दिन आऐ है मेरे, दुर्दिन आऐंगे तेरे ! गुज़ारिश है बस इतना, कर लेना तू बुधवाद सवेरे !! तुम भी हो सफ़र में अपनी, हम भी है सफ़र में अपनी ! है  उससे  ईश्क  तुम्हे  कितना, मुझे  है देखनी !! मै  तो  हूँ मदिर […]

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वे नज़रों से ओझल हो गए

    वे नज़रों से ओझल हो गए  आज सन्नाटा पसरा है समूचे घर में। मम्मी बट्ट-खर्चा बाँध रही है, लगभग सेर-भर सुखी चुड़ा, थोड़ी-सी गूढ़ का ढेला और दस-बारह हरी मिर्च भी, साथ मे कुछ रोती प्याज और उदास पड़ी नमक को भी बाँधी जा रही है। पापा खुश दिख रहे है, पर पता […]

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अंदाज अपना अपना

मै गीत लिखता जाऊँ मै गीत लिखता जाऊँ तेरी प्रीत लिखता जाऊँ ! के ढल रही है ये समां मै यौवन का हर रीत लिखता जाऊँ ! भँवर न उलझा रह जाए कहीं इस मोहिनी उपवन में तुम्हारी ! के  छोटी इस उम्र में अपनी बात बड़ी गढ़ता जाऊँ ! मै खान बनूँ मधुशाला का […]

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खाली-खाली सा रहता है मन

॥ खाली-खाली सा रहता है मन ॥ खाली-खाली सा रहता है मन, मधुर-बुंदों का संचार चाहिए । छल-प्रपंचो का है यह मेला, हमे निःस्वार्थ-प्रेम से भरा संसार चाहिए। बहुत हुआ साहब ! नही चाहिए हमे सपनें अच्छे दिनों के, रोक सके जो गरीबी,बेरोजगारी और पलायन,सच में, हमे ऐसा कृतसंकल्पित सरकार चाहिए । भारी-भारी सा रहता […]

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तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला

   ॥ तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला ॥ संजोता आया है जो अबतक,अस्पष्ट सपनें । उसे हकीकत में जीने की आश में तो आ ।। चमक उठेगी दुनियाँ भर की आँखें, सच में । पहले तुम अपने दिल के पास में तो आ ।। महफ़िल भी अपनी होगी, मुकद्दर भी अपना […]

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क्यो खुद को तू इतना अलंकृत करने लगी है

तेरी क़ातिल निगाह इस अबोध मन को झंकृत करने लगी है।क्या है तेरी ख़्वाहिस क्यो खुद को तू इतना अलंकृत करने लगी है ।।                                        मेरा रुह का परिंदा भी अब होस में आने लगी है ।  […]

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मिले ग़र सानिध्य आपका

 ॥ मिले ग़र सानिध्य आपका ॥ चित्र आभार : गूगल मिले ग़र सानिध्य आपका अपनी प्रतिभा को हम भी          निख़ारना चाहते है । मोनू जी आपके ही जैसा हम भी स्वच्छंद उड़ना चाहते है । मिले ग़र सानिध्य आपका अपनी तंगहाली को हम भी      साहित्य में पिरोना चाहते है […]

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उसकी निगाहें

                                ॥ उसकी निगाहें ॥ झकझोरती है उसकी यादें मुझे अब भीशायद निगाहें उसकी कुछ कहना चाहती थी ।                    वो जुबां से कुछ कह ना सकी और          […]

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मेरी गुनाह क्या है ।

               ॥ मेरी  गुनाह क्या है ।। चित्र आभार :गूगल क्यूं हूँ मै बेबस मेरी गुनाह क्या है । क्यो भटकती हूँ मै दर-दर मेरी पनाह कहाँ है ।                       मै जख्मी हूँ मै लूटी हूँ       […]

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तुम और हम ।

                   ॥तुम और हम॥ तुमने हाँक लगाई, हम हुँकार बन गये। तुमने हाथ लगाया, हम हथियार बन गए।।                      तेरी फूँक से उठी थी चिन्गारी कभी-                      धधक उठीं […]

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