मिले ग़र सानिध्य आपका

 ॥ मिले ग़र सानिध्य आपका ॥

चित्र आभार : गूगल

मिले ग़र सानिध्य आपका
अपनी प्रतिभा को हम भी
         निख़ारना चाहते है ।
मोनू जी आपके ही जैसा हम भी
स्वच्छंद उड़ना चाहते है ।

मिले ग़र सानिध्य आपका
अपनी तंगहाली को हम भी
     साहित्य में पिरोना चाहते है ।
मोनू जी आपके ही जैसा हम भी
वह दंतुरित मुस्कान को फिर से
                 मुस्कुराना चाहते है ।
मिले ग़र सानिध्य आपका
अपनी ज्वालामुखी ऊर्जा को हम भी
                   संचारना चाहते है ।
मोनू जी आपके ही जैसा हम भी
पृथ्वी के इस भू-तल पर परचम अपना
                   लहराना चाहते है ।
मिले ग़र सानिध्य आपका
अपनी व्यथा को हम भी
       किसी से न कहना चाहते है ।
मोनू जी आपके ही जैसा हम भी
सहस्रों की भीड़ में अविचल होकर
      संभाषन अपना देना चाहते है ।
मिले ग़र सानिध्य आपका…….
  © अमित  फोर्बेसगंजी

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