तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला

   ॥ तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला ॥

संजोता आया है जो अबतक,अस्पष्ट सपनें ।
उसे हकीकत में जीने की आश में तो आ ।।

चमक उठेगी दुनियाँ भर की आँखें, सच में ।
पहले तुम अपने दिल के पास में तो आ ।।

महफ़िल भी अपनी होगी, मुकद्दर भी अपना होगा ।
तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला ।।

कीर्ति-पट्टिकाएं भी तुम्हारी लगेंगी, उत्सव भी तुम्हारा होगा ।
जर्रे-जर्रे में पहले तुम नई ऊर्जाओं का उफ़ान तो ला ।।
   अमित  फोर्बेसगंजी

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