Pulwama terror attack

वक्त की आवाज़… शहादत पर गर्व नही, सवाल कर गद्दारों का इंतकाल अब,अभी तत्काल कर बहाओगे आंसू कब तक,यूं सपूतों के कुर्बानी पर है लेना बदला ग़र, उठो,संभलो, और बवाल कर ।        चित्र आभार : गूगल लेना उरी का बदला हों,हों या पुलवामा बहुत हुआ अब,हमें करना ही होगा हंगामा शांति का […]

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Only for you

                       चित्र आभार : गूगल तेरी याद में…♥ आधुनिक नारी-शक्ति का तुम, प्रतिमूर्ति लगती हो मोदी-राज  मेंं नव-अंकुरित तुम, स्मृति लगती हो पलपल बदलती संवेदनाओं को, मै समझूं क्या सावन मेंं आई बयार की तुम, अनुकृति लगती हो । © अमित फोर्बेसगंजी

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सफ़र-ए-जिन्दगी

♥सफ़र-ए-जिन्दगी♥ जिन्दगी की इस दौर मे मुस्कुरा कर चलिए सबके सामने दिल का पिटारा मत खोलिए, सफ़र आसांं हो जाएगी सच मानिये ग़र दामन मे लगे दाग समय से पहले धो लिए, जिन्दगी की इस दौर में………………………… कौन कैसा है यहांं ? प्रश्न हैं कई जहाँ  असली चेहरा किसी का दिखेगा नही, इसलिए स्वयं को […]

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किसान और बादल

देखकर फटती काया बादलों की किसानों ने एक आश पाली होगी, समझे ग़र दर्द हमारा ईश्वर कभी तो आज नही तो कल हमारे घर भी हरियाली होगी । ©अमित फोर्बेसगंजी चित्र आभार : गूगल

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चाहत है नही मेरी, किसी के राहों का काँटा बन जाना !

अपने प्रेम के खातिर, किसी के प्रीत का छिन जाना !! दुर्दिन आऐ है मेरे, दुर्दिन आऐंगे तेरे ! गुज़ारिश है बस इतना, कर लेना तू बुधवाद सवेरे !! तुम भी हो सफ़र में अपनी, हम भी है सफ़र में अपनी ! है  उससे  ईश्क  तुम्हे  कितना, मुझे  है देखनी !! मै  तो  हूँ मदिर […]

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वे नज़रों से ओझल हो गए

    वे नज़रों से ओझल हो गए  आज सन्नाटा पसरा है समूचे घर में। मम्मी बट्ट-खर्चा बाँध रही है, लगभग सेर-भर सुखी चुड़ा, थोड़ी-सी गूढ़ का ढेला और दस-बारह हरी मिर्च भी, साथ मे कुछ रोती प्याज और उदास पड़ी नमक को भी बाँधी जा रही है। पापा खुश दिख रहे है, पर पता […]

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अंदाज अपना अपना

मै गीत लिखता जाऊँ मै गीत लिखता जाऊँ तेरी प्रीत लिखता जाऊँ ! के ढल रही है ये समां मै यौवन का हर रीत लिखता जाऊँ ! भँवर न उलझा रह जाए कहीं इस मोहिनी उपवन में तुम्हारी ! के  छोटी इस उम्र में अपनी बात बड़ी गढ़ता जाऊँ ! मै खान बनूँ मधुशाला का […]

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खाली-खाली सा रहता है मन

॥ खाली-खाली सा रहता है मन ॥ खाली-खाली सा रहता है मन, मधुर-बुंदों का संचार चाहिए । छल-प्रपंचो का है यह मेला, हमे निःस्वार्थ-प्रेम से भरा संसार चाहिए। बहुत हुआ साहब ! नही चाहिए हमे सपनें अच्छे दिनों के, रोक सके जो गरीबी,बेरोजगारी और पलायन,सच में, हमे ऐसा कृतसंकल्पित सरकार चाहिए । भारी-भारी सा रहता […]

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तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला

   ॥ तुम अपने खून में पहले नई उबाल तो ला ॥ संजोता आया है जो अबतक,अस्पष्ट सपनें । उसे हकीकत में जीने की आश में तो आ ।। चमक उठेगी दुनियाँ भर की आँखें, सच में । पहले तुम अपने दिल के पास में तो आ ।। महफ़िल भी अपनी होगी, मुकद्दर भी अपना […]

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क्यो खुद को तू इतना अलंकृत करने लगी है

तेरी क़ातिल निगाह इस अबोध मन को झंकृत करने लगी है।क्या है तेरी ख़्वाहिस क्यो खुद को तू इतना अलंकृत करने लगी है ।।                                        मेरा रुह का परिंदा भी अब होस में आने लगी है ।  […]

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